DDT Full Form In Hindi | जानिए क्या है DDT, पूरी जानकारी

DDT Full Form in Hindi, DDT Ka Pura Naam Kya Hai, DDT क्या है, DDT Ka Full Form Kya Hai, DDT का Full Form क्या है,  DDT कैसे होता है, DDT क्या क्या कार्य होता है।आज इन सभी सवालों के जबाब आपको इस Post में दिया जाएगा। 

दोस्तों आज का हमारा आर्टिकल DDT के बारे में DDT Full Form in Hindi के साथ साथ DDT के उपयोग ,डीडीटी के गुण इसके कारण  होने वाली हानियां आदि सब के बारे में विस्तार जानेंगे। DDT एक प्रकार का योगिक है ,जिसका उपयोग कीटनाशक के रूप में गया जाता है,अर्थात डीडीटी को कीटों को नष्ट करने के लिए किया जाता है।इसका मु

ख्यत उपयोग मलेरिया पैदा करने वाले मच्छरों को मारने के लिए किया जाता   है।आइए जानते हैं कि कैसे डीडीटी का उपयोग बीमारियों से बचने तथा फसलों को कीड़ों से बचाने आदि के रूप में किया जाने लगा । DDT Full Form in Hindi

कैसे इसकी ख्याली इतनी बड़ी और इसके धीरे धीरे कैसे दुष्परिणाम सामने आने लगे। और क्यों शुरू में इसके उत्पादन को बढ़ाया गया तथा बाद मे क्यों ज्यादातर देशों इसके विपरीत प्रभाव को मनुष्य जानवर और जीव जंतु मे देखने को मिले। जिसके बाद इसके उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया ।

विकिपीडिया के अनुसार डीडीटी

The DDT Full Form is Dichloro-Diphenyl-Trichloroethane. 

यह पहला आधुनिक कीटनाशक था, जो मलेरिया के विरूद्ध प्रयोग किया गया था, किंतु बाद में यानि 1950 के बाद इसे कृषि कीटनाशी रूप में प्रयोग करने लगे थे। ये एक प्रकार का रसायनज्ञ है ,जिसका प्रयोग खेतों में फसलो पर होता है इसके भारी प्रयोग से अनेक क्षेत्रों में मच्छर इसके प्रति प्रतिरोधी हो गए। इसका मुख्य उपयोग मच्छरों, खटमलों ,आदि को नियंत्रित करने में किया जाता है। आईए जानते है DDT की पूरी जानकारी हिन्दी मे।

  • DDT की खोज।
  • DDT को बनाने की विधि
  • ।DDT के भौतिक गुण।
  • DDT Full Form in Hindi.
  • DDT का इतिहास।
  • DDT के लाभ।
  • DDT के उपयोग।
  • DDT के हानियां एवम नुकसान।

DDT की खोज

DDT को सर्वप्रथम 1873 मे आस्ट्रोलिया के वैज्ञानिक ओथमार जोड्लर के द्वारा संश्लेषित किया गया ।था।किंतु इसके कीटनाशक गुण के प्रभाव की खोज 1939 में स्विट्जरलैंड के विज्ञानिक paul Hermann Mollar ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय की थी। DDT का मुख्य तक मलेरिया फैलाने वाले एनोफिलीज  नामक मादा मच्छर तथा टाइफश वाहक जुन्हो को नष्ट करने के काम में आती है ,बाद में इसका उपयोग सलभ फसलों की बीमारी आदि को समाप्त करने के लिए कृषि क्षेत्र मे किया जाने लगा किया जाने लगा।

DDT को बनाने की विधि

DDT को बनाने के लिए जब फ्लोरल को सांद्र H2SO4की उपस्थिति मे क्लोरोबेंजिन के साथ संघनित करते हैं ,जिसके परिणाम स्वरूप DDT प्राप्त होता है।जिसका मुख्यत गुण कीटनाश्क होता है।

इसके अन्य भौतिक गुण निम्नअनुसार।

DDT के भौतिक गुण

  • DDT एक रंगहीन क्रस्टलीय पदार्थ है।
  • DDT गंध रहित होता है।
  • DDT लगभग स्वाद रहित होता है।
  • यह जल में अविलेय होता है। किंतु
  • कार्बन विलायक में विलय होता है।
  • DDT स्वेत चूर्ण रूप में होता है।

DDT FULL FORM IN HINDI

DDT Full Form in Hindi अर्थात Dhychloro Dhyphynil Triethen तथा हिन्दी में इसका मतलब (डाईक्लोरो डडाईफेनिल ट्राई इथेन ) होता है।

यह तो आप सब ने देखा होगा कि जब बारिश और गर्मी के मौसम में हमारे शहरों में धुंवे वाली दवाई का छिड़काव किया जाता है। पर कभी आपने यह सोचा कि यह कीटनाशक दवा में कई प्रकार के रसायनिक तत्व होते है,जी की मच्छर कीड़ों मकोड़ों को नष्ट कर सकते हैं

,तो सोचिए की उसका प्रभाव इंसान पर भी पढ़ता होगा ।आज हम एक ऐसे ही केमिकल डीडीटी के बारे में विस्तार से जानेंगे दरअसल इसकी शुरुआत भी कुछ आज के  हालातों की तरह एक परिस्थिति में हुई थी

जैसे कि वर्तमान में कोरोना कोविड-19 संक्रमण के कहर का सामना कर रहे है। वैसे ही द्वितीय विश्व युद्ध के समय मलेरिया नामक बीमारी के खिलाफ अमेरिका की सेना चलाई गई मुहिम मे DDT का उपयोग सर्वप्रथम कीटनाशक के रूप में 1939 मे किया गया था।

डीडीटी कीड़ों की त्वचा के अंदर चला जाता है, तथा उन्हें निष्क्रिय कर नष्ट कर देता है। उस समय अमेरिकन फौज की उस क्रांति को बड़ी सफलता मिली थी। शुरुआत में इसका (डीडीटी) उपयोग सर्दीनिया में किया गया था , DDT Full Form in Hindi

जिसके फलस्वरूप सर्दिनिया आज पूर्णता मलेरिया मुक्त है। सर्दीनिया के अलावा भी दक्षिणी प्रशांत के अन्य क्षेत्रों में भी अमेरिका की सेना ने ऐसे कार्यक्रम की शुरुआत की थी ,उसके बाद से ही DDT को मुख्यतः बीमारियों को  फैलाने वाले कीटों को नष्ट कर उनसे बचने के लिए छिड़काव के रूप मे रक्षा कवच की तरह उपयोग किया जाने लगा।

सन 1955 के दशक मे WHO (विश्व स्वास्थ्य गठन) ने कई दक्षिणी अमेरिकन क्षेत्रों में इस्तेमाल किया ।विशेषज्ञों के एक आकलन के अनुसार 80 के दशक के पूर्व ही डीडीटी ने एक करोड़ के लगभग लोगों की जान बचा ली थी।

उसके बाद सन 1950 के दशक में इसकी ख्याति बढ़ने के बाद डीडीटी का उपयोग फसलों के कीड़ों को नष्ट करने के लिए और फासलो को नुकसान पहुंचाने वाले जीवों समाप्त करने के लिए पाउडर के रूप में किया जाने लगा ।

यह सस्ता तथा उपयोग में सरल होने के कारण भारी मात्रा में इसका उत्पादन किया जाने लगा। मानो बीमारी और संक्रमण से बचने के लिए लोगों को ब्रह्मास्त्र (DDT) मिल गया हो। 1969 तक हों 5 टन डीडीटी सारी दुनिया पर फैला दिया गया था

।लेकिन कहते हैं ना कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, एक अच्छा और एक बुरा DDT का दूसरा रूप भी धीरे धीरे सामने आने था ।DDT एक कीटनाशक जहर है ,जिसका प्रभाव एक लंबे समय तक रहता है,

अर्थात कई सालों तक तथा इसका विष अलग-अलग स्रोतों से एकत्रित होकर साल दर साल बढ़ता जाता है। साथ ही इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में फसलों से कीटों को नाश  करने के लिए भी किया जाता था।

पर जैसा कि हमने पढ़ाई भी करें सालों तक नष्ट नहीं होता अर्थात DDT Full Form in Hindi का दुष्परिणाम उन फसलों फल सब्जी तथा अनाज को ग्रहण करने वाले अन्य पशु पक्षी यहां तक कि मानव पर भी पढ़ने लगा था।

1960 की दशक में एक रिसर्च के दौरान डरावना सच सामने आया जब वैज्ञानिकों ने डीडीटी कैंसर ,युकेनीय और हाई ब्लड प्रेशर मे संबंध पाया तथा पशुओं द्वारा DDT युक्त चारा इत्यादि खाने के कारण दूध में भी इसकी मात्रा पाई जाने लगी।

यहां तक कि नवजात शिशुओं में डीडीटी की मात्रा अत्यधिक मिलने लगी जो कि उन्हें मां के दूध से मिलती थी। जिसके बाद 1969 से डीडीटी पर अन्य देशों की सरकार ने बैन लगाना शुरू कर दिया।और धीरे धीरे इसका उपयोग लगभग सभी देशों ने बंद कर दिया ।तथा कुछ क्षेत्रों में इसका उपयोग बहुत कम कर दिया।

DDT के लाभ

DDT के उपयोग से लोगो की बहुत क्षेत्रों में मदद हुए ।

और इसके समय समय पर इसके लाभ भी प्राप्त हुए ।

दृतिय विश्व युद्ध के दौरान सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि DDT ने मलेरिया के खिलाफ लोगो के लिए बहुत सहायक सिद्ध हुआ।तथा लोगो की जान बचाने के काम में उपयुक्त साबित हुआ था।

जिसका उपयोग आज भी कई क्षेत्रों में बीमारियों से बचने के लिए किया जाता है। किंतु यह लाभ या फायदे शुरूआत मे तो वरदान की तरह काम आए, लेकिन समय के साथ कैसे इनके नुकसान दिखने लगे। जिनके बारे मे हम आगे जानेंगे। DDT उपयोग से कुछ लाभ उदाहरण के माध्यम से नीचे समझाए गए है। DDT Full Form in Hindi

  • शक्तीशाली कीटनाशक के रूप में उसका व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाता है।
  • कीड़े मकोड़ों को मारने के लिए।
  • मुख्यता मलेरिया फैलाने वाले मच्छर को नष्ट करने के लिए।
  • कृषि पिडको को मारने के लिए
  • टाइफस वाहक जुन्हों को समाप्त करने के लिए।
  • DDT शक्तिशाली तथा सस्ता होते हैं।
  • कम मात्रा में उपयोग करने से प्रदूषण नहीं होता है।

DDT के उपयोग

DDT Full Form in Hindi का सर्वप्रथम प्रयोग दृतीय विश्व युद्ध के दौरान मलेरिया से लड़ने के लिए अमेरिकन सेना द्वारा किया गाय।जिसकी सफ़लता को देखते हुए बाद में DDT का उपयोग  पूरे विश्व में कीटनाशक के रूप में रक्षा कवच की दृष्टि से तेज स्तर से बढ़ने लगा। तथा उस समय लोगो को मलेरिया महामारी से बचाया जिस के कुछ उदाहरण निम्न प्रकार है।

  • मुख्यत डीडीटी का उपयोग मलेरिया फैलाने वाले मच्छर को मारने के लिए तथा इंसानों की जान बचाने के लिए छिड़काव के रूप में किया जाता है।
  • इसका उपयोग शक्तिशाली कीटो को नष्ट करने में किया जाता है।
  • खेतों में लगने वाली फसलों को कीडे मकोड़ा और कीटों से फसलों की रक्षा करने के लिए।
  • DDT का उपयोग yello fever नामक बुखार के उपचार में भी करते हैं।
  • DDT का उपयोग टायफस वाहक जुन्हो समाप्त करने के लिए किया जाता है।
  • प्रदूषण समाप्त करने तथा सतहो से बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए किया जाता है।
  • इंसान और जानवरों पर इसका उपयोग नहीं गया है। सीधा जीवों और इसका उपयोग करने से उसकी मृत्यु है।क्योंकि इसमें हानिकारक रसायनिक तत्व होते है।
  • DDT बहुत सस्ता और आसानी से उपल्ब्ध हो जाता है।

DDT से होने वाली हानियां

पूर्व में इसके गुणकारी और कीटनाशक प्रभाव को देखते हुए निरंतर उसके उपयोग में वृद्धि होती गई। सन 1940 के अंत डीडीटी का अत्यधिक उपयोग होने के कारण कई समस्याए  सामने आने लगी ।

कीटों की कई प्रजातियों ने DDT Full Form in Hindi के विरुद्ध एक अपनी प्रतिरोधक क्षमता का विकास कर लिया था। जिसके कारण डीडीटी के प्रभाव में कमी आने लगी थी। तथा DDT को जब कीटनाशकों कीड़ा जंतुओं को नष्ट करने के लिए खेतो मे उपयोग किया जाने लगा था ।

किंतु डीडीटी का पुर्ण अपघटन ना होने के कारण तथा डीडीटी शीघ्रता से उपापचय नही होता है ।यह रासायनिक स्थायित्व में और वसा में विलय है, जिसके परिणाम स्वरूप DDT वसीय को में संग्रहित हो जाती है, कुछ अंश शेष रह जाते है।

जिसे इंसानों तथा जानवरों द्वारा खाए जाने से उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने लगा। तथा इसका परिणाम यह हुआ, कि बढ़ी हुई डीडीटी की मात्रा जंतुओं के प्रजनन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती है ।जिसके कारण यह एक जटिल समस्या बन गई। और

खेतों का डीडीटी युक्त जल प्रभावित होकर नदियों में जाता है। तथा इस DDT के मिले दूषित विषैले जल को मछलियां ग्रहण करती है। जिसके फलस्वरूप उनको फेफड़ों की बीमारियों होने लगती है।

डीडीटी मिश्रित दूषित जल मछलियों के लिए अत्यधिक हानिकारक हो गया था ।जिसके कारण उनकी मृत्यु होने लगी थी। डीडीटी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लाखों लोगो की जान बचाई तथा विशेष कर उन देशों में जो अविकसित थे।

तथा फसलों में लगने वाले अन्य प्रकार के कीटो का विनाश किया । सन 1962 में एक लेखक Richel carson की पुस्तक Silent Spring प्रकाशित की जिसमें डीडीडी के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराया।

जिसके परिणाम स्वरूप लोगों का ध्यान डीडीटी से होने वाले दुष्परिणाम जैसे इंसान और जानवरों की मौत का खतरा की ओर आकर्षित किया।इसके दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 1973 में USA  ने और कई देशों में DDT पर प्रतिबंध लगा दिया गया।भविष्य में डीडीटी के घातक परिणामों से बचने के लिए समय रहते इसके उत्पादन पर रोकथाम लगाई थी।किंतु विश्व के अनेक जगह आज भी कम मात्रा मे डीडीटी का उपयोग किया जाता है।

DDT के उपायों से होने वाले नुकसान

  • डीडीटी के अधिक उपयोग से मानव और जानवरों की जान को खतरा होता है।
  • इसके खेतो में उपयोग से यह सामान्य जन जीवन को तो प्रभावित करती है। साथ ही
  • DDT युक्त पानी खेतो से जल स्रोतों में जाता है जिसके कारण ये जल में रहने वाले जीवों को भी नष्ट कर देता है।
  • DDT के कारण जंतुओ की प्रजनन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ने लगा
  • यहां तक की DDT के उपयोग से कैंसर ,हैब्लड प्रेशर, यूकेनिय जैसी बीमारियां होने लगी।
  • स्तनपान करा माताओ द्वारा शिशुओं में DDT की मात्रा में लगी।
  • लम्बे समय सतहों पर रहने कारण इसकी शक्ति लगातार बढ़ती जाती है।जिसके कारण ये और भी खतरनाक हो जाता है।

तो दोस्तो में उम्मीद करता हूं की मेरे द्वारा  दी गई डीडीटी की जानकारी आपको पसंद आई होगी ।और साथ ही में अपको सलाह देना चाहूंगा ।कि जिस भी केमिकल का उपयोग आप करते हैं, चाहे वह किसी भी रुप में खाद्य पदार्थ या अन्य किसी प्रकार से डीडीटी हो या और कुछ रासायनिक पदार्थ उनकी अच्छे से जांच करें तथा ज्यादा से ज्यादा घरेलू नुस्खे का उपयोग करें तथा मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

ऐसे खतरनाक रसायनों से बचकर रहें जो क्षणिक लाभ तो देते हैं ,परंतु आगे चलकर इनके परिणाम भयंकर घातक सिद्ध हो सकते हैं। जिसके कारण सामान्य जनजीवन तथा पशु पक्षी, जानवर प्रकृति पर खतरनाक असर होते है। जैसे हमने आज डीडीटी के अविष्कार से लेकर इसके उपयोग किन क्षेत्रों में तथा इसकी जरूरत क्यों पड़ी और क्या इसकी हानियां थी

कैसे डीडीडी शुरुआत में एक वरदान की तरह काम आया लेकिन बाद में इसने अपना दूसरा चेहरा अर्थात दुष्परिणाम दिखाएं। जिसके चलते धीरे धीरे कहीं देशों में इसे हमेशा के लिए बंद कर दिया गया तथा इसके उत्पादन में कमी कर दी किंतु कुछ क्षेत्रों में आज भी इसका उपयोग किया जाता है ।हम जान चुके हैं ,कि डीडीटी एक कीटनाशक होने के साथ-साथ एक खतरनाक रासायनिक तत्वों मिश्रित पदार्थ है

,जिसका लंबे समय तक उपयोग जन जीवन के लिए हानिकारक हो। सकता है ,तो याद रखिए कोई भी ऐसी वस्तु या रासायनिक तत्व या पदार्थ जिसके दुष्परिणाम बाद में घातक सिद्ध होते हैं, उनके उपयोग में कमी लाई जाए तथा प्राकृतिक चीजों के उत्पादन व इस्तेमाल को बढ़ाया जाए ।

Conclusion

तो दोस्तों, आपको  के बारे में जानकारी हिंदी में। अच्छी लगी होगी हमे उम्मीद है इस पोस्ट को पढ़ कर आप ddt full form In Hindi (ddt मीनिंग इन हिंदी) समझ गए होंगें और अब अगर आपसे कोई पूछेगा कि ddt का मतलब क्या होता है? तो अब आप उसे ddt मीनिंग इन हिंदी बता सकेंगे।

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