BPO FULL FORM IN HINDI – जानिए क्या है BPO, पूरी जानकारी

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BPO Full Form in Hindi, BPO Ka Pura Naam Kya Hai, BPO क्या है, BPO Ka Full Form Kya Hai, BPO का Full Form क्या है, BPO meaning, BPO क्या क्या कार्य होता है। इन सभी सवालों के जबाब आपको इस Post में दिया जाएगा।

दोस्तों! BPO शब्द के बारे में तो आपने पहले भी सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि BPO full form in Hindi क्या है? यदि नहीं तो BPO के बारे में जानना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है क्योंकि यह आमतौर पर लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द हैं जो ना केवल आपकी जीवनशैली बल्कि रोजगार पाने में भी काफी मदद कर सकते हैं।

यदि आप अब तक नहीं जानते कि BPO full form in Hindi क्या है तो हम आपके लिए इस आर्टिकल में BPO full form in Hindi के साथ-साथ इससे जुड़ी कई जानकारियां लेकर आए हैं, जिसकी मदद से आप इस विषय के बारे में अधिक जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे।

इस आर्टिकल में हम आपको BPO full form क्या होता है?, BPO का क्या मतलब है?, BPO से जुड़े काम क्या हैं? जैसी सभी जानकारियां बताने वाले हैं। इसे जानने के लिए आप इस पोस्ट को अंत तक पढ़ें क्योंकि यहां हमने BPO full information in Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई है। BPO के अंतर्गत आने वाली हर बात और कार्य यहां निम्नलिखित हैं –

BPO का फुल फॉर्म क्या होता है? ( BPO FULL FORM IN HINDI ?)

BPO का फुल फॉर्म Business Process Outsourcing होता है। BPO को हिन्दी की भाषा में बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग भी कहा जाता है।

BPO क्या है? (What is BPO in Hindi?)

BPO यानि Business Process Outsourcing का मतलब है कि कोई कम्पनी या बिज़नेस अपने काम को किसी दूसरे से कराए। BPO की मदद से कोई बिजनेसमैन या बिज़नेस अपने मुख्य काम के अलावा मौजूद दूसरे कामों को किसी अन्य व्यक्ति या कम्पनी से करवाए तो उस प्रक्रिया को BPO यानि Business Process Outsourcing कहते हैं। इस BPO की मदद लेने वाली कम्पनी या बिज़नेस अपना पूरा ध्यान अपने बिज़नेस या मुख्य काम में लगते हैं जिसकी वजह से कम्पनी के छोटे छोटे कई कम कोई तीसरी पार्टी या कम्पनी करती है और उनका बिज़नेस तरक्की करता है।

BPO के फायदे क्या हैं? (What are the benefits of BPO in Hindi?)

जैसा कि हमने आपको बताया कि BPO की मदद से कोई भी बिज़नेस या कम्पनी अपना काम किसी और से करवाती है और इसकी वजह से उस बिज़नेस में को ना केवल बढ़ाया ना सकता है बल्कि इससे BPO देने वाले उस कम्पनी को कई फायदे भी होते हैं। BPO की मदद से कम्पनी के पैसे और समय दोनों की बचत हो सकती है। जैसे कि मान लीजिए कि आपकी कम्पनी किसी समान का उत्पादन कर रही है और आप उस समान का प्रचार कर उसकी बिक्री ऊंचे स्तर पर पहुंचाना चाहते हैं

जिसके लिए आपको लोगों को अपने समान के बारे में बताकर अलग अलग जगहों पर प्रचार करना पड़ेगा लेकिन अगर आप BPO की मदद लेते हैं तो आप अपने सामान का प्रचार करने के लिए किसी advertisement कम्पनी को कॉन्ट्रैक्ट देकर आसानी से कर सकते हैं जिसमें नए लोगों को हायर करने, उन्हें समझाने का समय और प्रचार करने का खर्च दोनों बच सकता है।

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BPO के कितने प्रकार होते हैं? (How many types of BPO in Hindi?)

BPO के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं जो निम्नलिखित हैं –

  1. BOO (Back Office Outsourcing या बैक ऑफिस आउटसोर्सिंग) – BPO के इस प्रकार में कम्पनी के अंदर के कामों के लिए किसी तीसरे पार्टी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है। इसके अंतर्गत BPO के तहत कम्पनी वैसे लोगों को हायर करती है जो उनके अकाउंट्स, कम्प्यूटर पार्ट्स, मानव संसाधन या कम्पनी के कर्मचारियों के कम की जानकारी रख सकें। ऐसे कामों के लिए कम्पनी किसी एक्सपर्ट पार्टी या ज्यादा कुशल और योग्यता वाले लोगों को हायर करती है।
  1. FOO (Front Office Outsourcing या फ्रंट ऑफिस आउटसोर्सिंग) – इस BPO प्रकार के अंतर्गत कम्पनी के बाहरी कामों के लिए तीसरे पार्टी को कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से कम्पनी द्वारा बनाए जा रहे सामानों को बेचना या उसका प्रचार करने का कम शामिल होता है। इस काम के लिए कम्पनी ज्यादा कुशल लोगों की मांग नहीं करती है। इसके तहत जनता में उस तीसरे पार्टी द्वारा ग्राहक को कम्पनी से जोड़ने का काम किया जाता है। कई बिज़नेस इसके लिए कॉल सेंटर या तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। BPO द्वारा हायर किए गए इस तीसरी पार्टी को लोगों में कम्पनी के सामान की बिक्री करा कर उस बिज़नेस को आगे बढ़ाने का काम दिया जाता है।

BPO की पढ़ाई कैसे होती है? (How to study BPO in Hindi?)

कई लोगों का मानना है कि BPO के द्वारा मिलने वाले काम के लिए किसी तरह की विशेष पढ़ाई नहीं होती है लेकिन हम आपको बता दें कि BPO में काम करने के लिए भी आपको विशेष रूप से लेकिन साधारण पढ़ाई करने की जरूरत है। BPO के अलग अलग कामों के लिए आपके पास उससे जुड़ी जानकारी और योग्यता होना भी जरूरी है। BPO में दोनों प्रकार यानि BOO और FOO के लिए आपको थोड़ी बहुत पढ़ाई के साथ समझ, तरीके और अनुशासन लाने की जरूरत है।

Back Office Outsourcing के अंतर्गत काम करने के लिए आपको कम से कम ग्रेजुएशन में किसी मुख्य विषय से पढ़ाई करनी होगी और Front Office Outsourcing के लिए कम से कम 12वीं की पढ़ाई तो पूरी करनी ही पड़ती है। BPO में किसी कम्पनी या बिज़नेस के लिए काम करने के लिए आपके पास अच्छे से बात करने की कला होनी चाहिए और साथ ही लिखने और बोलने जैसी संचार सुविधा उस व्यक्ति के पास होनी जरुरी है।

भारत में BPO का असर कैसा है? (How is the impact of BPO in India in Hindi?)

दोस्तों! जैसा कि हम जानते हैं कि भारत में डॉलर, यूरो जैसी मुद्राओं के मुकाबले रुपए का मूल्य कम है इसीलिए कई बाहरी और अंतरराष्ट्रीय कम्पनियां अपना काम और बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए भारत के लोगों की मदद लेता है और वह कम्पनियां इस आउटसोर्स के लिए सस्ते में भारत को अपना कॉन्ट्रैक्ट देती है। हालांकि भारत में भी इस BPO का काफी अच्छा असर होता है

क्योंकि भारत जैसे बड़े आबादी वाले देश में इस BPO के तहत कई काम मिल रहे हैं। इस BPO की मदद से कई बेरोजगारों को बड़ी आसानी से नौकरी मिल सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में करीब पांच मिलियन लोग इस BPO के अंतर्गत काम करते हैं।


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